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- By Advocate Jagdish Parashar
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मुस्लिम निकाह इस्लाम में एक धार्मिक और कानूनी समझौता है, जो दूल्हा और दुल्हन की आपसी सहमति से संपन्न होता है। निकाह को इस्लाम में एक सामाजिक-कानूनी अनुबंध (Civil & Religious Contract) माना गया है, जिसके माध्यम से पति और पत्नी के अधिकारों एवं कर्तव्यों की स्पष्ट रूपरेखा तय होती है। हमारी Muslim Nikah Service आपको शरीयत के अनुसार सही प्रक्रिया, अनुभवी मौलवी और आवश्यक दस्तावेज़ी सहायता प्रदान करती है।
निकाह कोई संस्कार नहीं बल्कि एक समझौता (Contract) है, जिसमें दूल्हा और दुल्हन दोनों की स्वतंत्र और स्पष्ट सहमति अनिवार्य होती है। यह सहमति प्रस्ताव (इजाब) और स्वीकृति (क़ुबूल) के माध्यम से गवाहों की उपस्थिति में दी जाती है।
सबसे पहले मौलवी या वली (अभिभावक) द्वारा निकाह का प्रस्ताव रखा जाता है। इसके बाद दूल्हा और दुल्हन “क़बूल है” कहकर अपनी सहमति देते हैं। गवाहों की उपस्थिति में मेहर तय किया जाता है और कुरान की आयतों व दुआ के साथ निकाह मुकम्मल किया जाता है।
निकाह के दौरान निकाहनामा (Nikahnama) पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। बाद में कानूनी मान्यता के लिए पहचान पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और फोटो जैसे दस्तावेज़ों के साथ विवाह पंजीकरण कराया जाता है। हम इस पूरी प्रक्रिया में आपका मार्गदर्शन करते हैं।
शरिया कानून के अनुसार सहमति, गवाह और मेहर की शर्तें पूरी होने पर निकाह वैध (सहीह) माना जाता है। सांस्कृतिक रस्में जैसे मेहंदी या वालिमा परंपरा का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन निकाह स्वयं सरल और स्पष्ट अनुबंध होता है।
हमारा उद्देश्य है कि आपका मुस्लिम निकाह धार्मिक, सामाजिक और कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य और सुरक्षित तरीके से संपन्न हो।
जी हाँ, मुस्लिम निकाह एक धार्मिक और कानूनी अनुबंध है, जो दूल्हा और दुल्हन की आपसी सहमति से होता है।
निकाह के लिए दो मुस्लिम गवाह या एक पुरुष और दो महिलाओं की उपस्थिति आवश्यक होती है।
मेहर दूल्हे द्वारा दुल्हन को दिया जाने वाला वैवाहिक उपहार या राशि है, जो निकाह की अनिवार्य शर्त होती है।
हाँ, सरकारी रिकॉर्ड और कानूनी मान्यता के लिए निकाह के बाद विवाह पंजीकरण कराना आवश्यक होता है।
जी हाँ, ग्वालियर में अनुभवी मौलवी और कानूनी सहायता के साथ मुस्लिम निकाह सेवा उपलब्ध है।